5 Aug 2026, 17:07 UTC57 views6 reactionsread 9 August 2026 त्रिपुरेश्वरी के चार बाहु
सम्प्रदाय के अनुसार जाग्रत-स्वप्न-सुषुप्ति एवं तुर्य नामक चार दशाओं को समस्त श्रीचक्र की अर्थ स्वरूपिणी त्रिपुरेश्वरी के चार बाहुओं के रूप में प्रतिपादित किया है। त्रिपुरेश्वरी के चार अङ्ग दशाओं के उपलक्षण मात्र है, न कि पारमार्थिक स्वरूप। सुषुप्ति आदि तीन दशाएं बन्ध कारिणी है, अत: इनके आयुध इक्षु-चाप, पुष्प-वाण, एवं पाश कहे गये हैं।
इक्षु चाप रसमय मधुर होता है, एवं सुषुप्ति अवस्था -विश्रा…
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3 Aug 2026, 05:29 UTC63 views7 reactionsread 9 August 2026 Photo
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3 Aug 2026, 05:25 UTC70 views5 reactionsread 9 August 2026 श्रीपार्थिवलिङ्गपूजनविधिः
▪️ स्नानादि नित्यकर्म सम्पन्न करके शुद्ध अवस्था में शुद्ध आसन पर बैठकर तीन बार आचमन, शुद्धिकरण, शिखाबन्धन, आसनशुद्धि, भूतोत्सादन, दीपप्रज्वलन आदि करें।
गणेशाय नमः कह कर पात्र में अक्षत डाले।
'हराय नमः' का उच्चारण करके पार्थिवलिङ्ग बनानेके लिये मिट्टी ले।
'महेश्वराय नमः' का उच्चारण करके लिङ्गयोनिनिर्माण करे।
(मिट्टी के एक ही पिंड से लिङ्गयोनि का साथ में निर्माण करे, दो पिंडो में अलग अलग न…
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2 Aug 2026, 13:47 UTC49 views2 reactionsread 9 August 2026 शक्तिस्वरूप (प्राणावस्थाओं की शक्त्यंगो से तादात्म्य)
प्राण की विभिन्न अवस्थायें ही शक्ति का स्वरूप हैं। सुषुप्ति, स्वप्न, जाग्रतू, तुर्य, एवं तुर्यातीत नामक पाँच अवस्थाओं को शक्ति के वाम, दक्षिण, योनि, मुख एवं हृदय नामक अङ्गो के रूप में प्रतिपादित किया गया है। प्रत्यक्षत: अनुभव होता है कि दक्षिण अङ्ग सक्रिय होता है एवं जाग्रत् दशा भी प्रत्यक्षतः क्रियात्मक होती है। अत: जाग्रत अवस्था को महाशक्ति का दक्षिण अंग निरू…
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29 Jul 2026, 07:15 UTC78 views5 reactionsread 9 August 2026 Video
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29 Jul 2026, 03:43 UTC85 views6 reactionsread 9 August 2026 बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा।।
अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥
तुलसी के मानस का प्रारम्भ भी गुरुवन्दना से होता है। इस चौपाई से पूर्व भी तुलसीदास जी ने लिखा,
वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शङ्कररूपिणम्।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्र: सर्वत्र वन्द्यते।।
चंद्रमा यद्यपि टेढ़ा है फिर भी उसकी वन्दना सर्वत्र है। कारण? क्योंकि वह नित्य ज्ञानमय श्रीशङ्कररूपी गुरु के आश्रय में है। यदि गुरु का आ…
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29 Jul 2026, 03:41 UTC75 views9 reactionsread 9 August 2026 Photo
अनेकजन्मसमप्राप्तकर्मबन्धविदारिने । आत्मज्ञानाग्निदानेन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
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26 Jul 2026, 16:29 UTC72 views6 reactionsread 9 August 2026 Photo
कलयति समस्तानामविकल्पसविकल्पादीनां ज्ञानानां सृष्टिस्थितिसंहारपिधानानुग्रहात्मकपञ्चकृत्यानुसन्धानेन स्वात्मपरामर्शशेषतयैव सर्व परामृश्यतीति परैव संवित् काली इत्युच्यते ।
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24 Jul 2026, 04:50 UTC79 views5 reactionsread 9 August 2026 Video
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24 Jul 2026, 04:50 UTC86 views5 reactionsread 9 August 2026 श्रीललितात्रिपुरसुन्दर्यै नमः ।
जय जय जय ललिते ।
जय जगदीश्वरि मातः श्रीसुन्दरी ललिते,
त्वं मां पालय नित्यं विश्वेश्वरि वरदे ।
मञ्जुल मङ्गलदायिनि परमानन्द प्रदे,
सकलमनोरथ पूरिणि मातः श्री ललिते ॥ १ जय जय जय ललिते
जय श्रीचक्रनिवासिनि कामेश्वरि त्रिपुरे,
दीनं मामवलोकय कृपया श्रीललिते ।
शिववामाङ्क-विहारिणी मोहित भूतपते,
कलित-कलाधरमुकुटे नेत्र त्रय-शोभे ॥ २ जय जय जय ललिते
धनुरङ्कुशरपाशैः शोभित-क…
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15 Jul 2026, 16:02 UTC124 views4 reactionsread 9 August 2026 भगवती वाराही का महाविद्यात्व
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आषाढ़गत वाराही नवरात्र के प्रथम दिवस पर मैं आपको भगवती वाराही के महाविद्यात्व के विषय में, शास्त्रीय प्रमाणों पर आधारित इस लघुलेख के माध्यम से, अवगत कराता हूँ।
क्या महाविद्यायें केवल दस ही होती हैं?
इस प्रश्न का उत्तर है - नहीं ।
जनसामान्य और सुकुमारमति वाले अधिकांश शाक्त-साधक महाविद्याओं के केवल दशविध रूपों से ही परिचित हैं । आप में से भी अधिकांश ल…
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Showing the 12 most recent of 20 posts we hold for @shrimata. View and reaction counts are the latest single reading for each post, not a live figure, and a recent post is still accumulating both. A view count marked ≈ was rounded by Telegram before we ever saw it — t.me prints views in full below 1,000 and to three significant figures above, so ≈1,200,000 means somewhere between 1,150,000 and 1,249,999. Unmarked counts are exact. Text is reproduced from the public post preview and truncated for length.